हरतालिका तीज व्रत कथा 2025 | Hartalika Teej 2025 Vrat Katha, Pooja Vidhi, Aarti, Wishes & Importance
1. परिचय – हरतालिका तीज क्या है?
हरतालिका तीज हिंदू धर्म का एक प्रमुख व्रत और पर्व है, जिसे विशेषकर सुहागिन स्त्रियां और अविवाहित कन्याएं बड़े श्रद्धा भाव से मनाती हैं। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र मिलन की स्मृति में रखा जाता है। माना जाता है कि इस व्रत को रखने से स्त्रियों को सौभाग्यवती होने का वरदान मिलता है और अविवाहित कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है।
यह व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं, यानी बिना जल ग्रहण किए पूरे दिन पूजा करती हैं। पूजा में माता पार्वती और भगवान शिव की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर उनकी विधिवत पूजा की जाती है।
2. हरतालिका तीज 2025 तिथि व शुभ मुहूर्त
हरतालिका तीज 2025 की तिथि
तिथि – भाद्रपद मास, शुक्ल पक्ष, तृतीया
दिनांक – 27 अगस्त 2025 (बुधवार)
व्रत आरंभ – प्रातः काल से
पूजा का शुभ मुहूर्त – प्रातःकालीन समय सबसे श्रेष्ठ
पंचांग विवरण (2025)
तृतीया तिथि प्रारंभ – 26 अगस्त 2025, रात्रि 11:58 बजे
तृतीया तिथि समाप्त – 27 अगस्त 2025, रात्रि 09:12 बजे
👉 इस प्रकार व्रत और पूजा का मुख्य दिन 27 अगस्त 2025, बुधवार को मनाया जाएगा।
3. हरतालिका तीज का महत्व
हरतालिका तीज व्रत का महत्व अत्यंत गहरा है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से विवाहित स्त्रियों का वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है और उन्हें अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है। अविवाहित कन्याएं यदि यह व्रत करती हैं तो उन्हें योग्य व मनचाहा पति प्राप्त होता है।
धार्मिक दृष्टि से महत्व
यह व्रत माता पार्वती के तप और समर्पण की स्मृति में है।
भगवान शिव ने माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया।
इस दिन महिलाएं उसी भाव से पूजा करती हैं।
आध्यात्मिक दृष्टि से महत्व
उपवास आत्मसंयम और साधना का प्रतीक है।
यह व्रत साधक को मन और आत्मा को शुद्ध करने का अवसर देता है।
सामाजिक महत्व
यह पर्व महिलाओं के लिए एकता और मेल-जोल का अवसर लाता है।
मेहंदी, गीत-संगीत और पूजा से वातावरण उत्सवमय हो जाता है।
🌸 हरतालिका तीज व्रत कथा (Hartalika Teej Vrat Katha)
1. कथा की पृष्ठभूमि
हरतालिका तीज की कथा माता पार्वती और भगवान शिव के दिव्य मिलन से जुड़ी हुई है। यह कथा इस पर्व का सबसे प्रमुख और आध्यात्मिक हिस्सा मानी जाती है। कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी।
2. हरतालिका व्रत कथा
प्राचीन काल में हिमालय की कन्या पार्वती ने यह निश्चय किया कि वे केवल भगवान शिव को ही पति रूप में स्वीकार करेंगी। लेकिन उनके पिता हिमवान उन्हें भगवान विष्णु के साथ विवाह के लिए तैयार कर रहे थे।
जब पार्वती को इस बात का पता चला तो वे अत्यंत व्याकुल हो उठीं। वे अपने सखियों के साथ वन में चली गईं और वहाँ कठोर तपस्या करने लगीं। उन्होंने कई वर्षों तक कठोर व्रत रखा और कठिनाइयों का सामना किया।
उनकी तपस्या देखकर सभी देवता, ऋषि और अप्सराएं आश्चर्यचकित रह गए। अंततः उनकी निष्ठा और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने माता पार्वती को अपनी पत्नी रूप में स्वीकार किया।
3. कथा का विवरण
कथा के अनुसार, जब हिमवान ने अपनी पुत्री पार्वती के विवाह का निर्णय भगवान विष्णु के साथ किया, तब पार्वती अत्यंत दुखी हुईं। वे अपनी सखियों के साथ घनघोर जंगल में चली गईं। वहाँ उन्होंने निर्जला व्रत रखा और केवल भगवान शिव का ध्यान करती रहीं।
उनकी इस तपस्या से धरती, आकाश और पाताल तक में हलचल मच गई। अंततः भगवान शिव स्वयं उनके सामने प्रकट हुए और कहा –
“हे देवी, तुम्हारी तपस्या और भक्ति से मैं प्रसन्न हूँ। मैं तुम्हें पत्नी रूप में स्वीकार करता हूँ।”
उस दिन से यह व्रत “हरतालिका तीज” के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
“हर” का अर्थ है – भगवान शिव।
“तालिका” का अर्थ है – सखियाँ (जिन्होंने पार्वती को जंगल ले जाकर विवाह से बचाया)।
इस प्रकार इस व्रत को हरतालिका कहा गया।
4. धार्मिक महत्व
इस कथा से यह शिक्षा मिलती है कि सच्ची श्रद्धा, भक्ति और संकल्प से भगवान अवश्य प्रसन्न होते हैं। माता पार्वती के तप और त्याग ने उन्हें शिव के समान वर प्रदान किया। यही कारण है कि इस दिन स्त्रियाँ व्रत रखकर माता पार्वती की तरह अखंड सौभाग्य और शिव-समान पति की कामना करती हैं।
5. कथा का संक्षिप्त रूप (सरल भाषा में)
हिमवान ने पार्वती का विवाह विष्णु से तय किया।
पार्वती अपनी सखियों के साथ वन में चली गईं।
उन्होंने शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की।
भगवान शिव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया।
तभी से यह व्रत “हरतालिका तीज” कहलाया और हर साल सुहागिन स्त्रियाँ इसे करती हैं।
6. हरतालिका तीज से जुड़ी विशेष मान्यता
इस दिन उपवास करने से स्त्रियों को अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है।
अविवाहित कन्याएँ यह व्रत करके मनचाहा वर प्राप्त कर सकती हैं।
इस व्रत की कथा सुनना और सुनाना दोनों ही पुण्यदायी माना जाता है।
कथा के बाद महिलाएं “हरतालिका आरती” करती हैं और माता पार्वती-शिव का स्मरण करती हैं।
7. हरतालिका व्रत कथा का सामाजिक पक्ष
यह कथा केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह हमें यह सिखाती है कि स्त्री की इच्छा का भी आदर होना चाहिए। माता पार्वती ने अपनी पसंद के अनुसार पति चुनने के लिए कठिन तपस्या की और अंततः उन्हें वही मिला।
🌸 हरतालिका तीज पूजा विधि (Hartalika Teej Pooja Vidhi)
हरतालिका तीज का व्रत केवल कथा सुनने और उपवास रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विधिवत पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन महिलाएँ माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।
1. व्रत का संकल्प (Sankalp)
सुबह स्नान करके महिलाएँ यह संकल्प लेती हैं –
“मैं माता पार्वती और भगवान शिव की कृपा पाने के लिए निर्जला हरतालिका तीज व्रत रखूँगी। यह व्रत मुझे अखंड सौभाग्य और सुख-समृद्धि प्रदान करे।”
2. पूजा सामग्री (Samagri)
हरतालिका तीज की पूजा के लिए निम्न सामग्री की आवश्यकता होती है –
भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र
मिट्टी से बने शिव-पार्वती-गणेश का स्वरूप (शिवलिंग भी रखा जा सकता है)
कलश (पानी, आम्र पल्लव और नारियल सहित)
लाल चुनरी, साड़ी और श्रृंगार सामग्री
चंदन, रोली, हल्दी, कुंकुम
बेलपत्र, धतूरा और फूल
मेहंदी, सिंदूर और बिंदी
फल, फूल, पंचामृत, दूध और दही
गन्ना, हल्दी की गांठ, सुपारी, नारियल
दीपक, अगरबत्ती और धूपबत्ती
मिठाई और प्रसाद (खासकर ghevar या हलवा-पूरी)
3. पूजा स्थल की तैयारी
घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में साफ-सफाई करके पूजा स्थान तैयार करें।
रंगोली बनाकर पूजा स्थल को सजाएँ।
एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएँ और उस पर माता पार्वती और भगवान शिव की प्रतिमा या मिट्टी का स्वरूप स्थापित करें।
4. पूजा की विधि (Step-by-Step Pooja Vidhi)
(a) कलश स्थापना
एक जलभरा कलश रखें, उस पर आम्र पल्लव और नारियल स्थापित करें।
कलश को पूजा का साक्षी मानकर भगवान गणेश का आह्वान करें।
(b) शिव-पार्वती-गणेश स्थापना
मिट्टी से बने शिव-पार्वती और गणेशजी को स्थापित करें।
लाल चुनरी से सजाएँ और श्रृंगार सामग्री अर्पित करें।
(c) पूजन क्रम
दीपक और अगरबत्ती जलाएँ।
गणेशजी की पूजा करके उन्हें बाधा-विनाशक के रूप में स्मरण करें।
भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, गंगा जल, दूध और चंदन अर्पित करें।
माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री जैसे मेहंदी, सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, काजल, बिछिया आदि अर्पित करें।
कथा का वाचन करें या सुनें।
“हरतालिका तीज व्रत कथा” समाप्त होने के बाद महिलाएँ एक-दूसरे को सुहाग सामग्री भेंट करती हैं।
5. पूजा का समय
प्रातःकालीन पूजा – सुबह स्नान कर संकल्प लें।
संध्या पूजा – सूर्यास्त के समय कथा और आरती करें।
रात्रि में माता-पार्वती-शिव का जागरण करने का विशेष महत्व है।
6. व्रत का नियम
यह व्रत निर्जला होता है यानी जल तक का सेवन नहीं किया जाता।
केवल रात्रि में पूजा और कथा के बाद व्रत खोला जाता है।
महिलाएँ अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं जबकि अविवाहित कन्याएँ मनचाहे वर के लिए यह व्रत रखती हैं।
7. हरतालिका आरती
पूजा के अंत में “हरतालिका आरती” गाई जाती है।
आरती में माता पार्वती और भगवान शिव का स्मरण कर सौभाग्य और आशीर्वाद की प्रार्थना की जाती है।
8. विशेष परंपराएँ
व्रत रखने वाली महिलाएँ एक-दूसरे को सिंदूर और सुहाग सामग्री देती हैं।
मेहंदी रचाना इस दिन का प्रमुख आकर्षण है।
रातभर जागरण और भजन-कीर्तन करने का भी महत्व है।
9. पूजा का फल
सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु प्राप्त होती है।
अविवाहित कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है।
परिवार में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।
🌙 हरतालिका तीज 2025: तिथि, मुहूर्त और महत्व
📅 हरतालिका तीज 2025 की तिथि
तारीख – 27 अगस्त 2025, बुधवार
व्रत प्रारंभ – 26 अगस्त 2025 रात 11:18 बजे से
व्रत समाप्ति – 27 अगस्त 2025 रात 09:35 बजे तक
⏰ पूजा का शुभ मुहूर्त
प्रातःकालीन पूजा समय – सुबह 05:30 बजे से 07:45 बजे तक
संध्या पूजन का समय – शाम 06:45 बजे से 08:15 बजे तक
आरती एवं कथा का समय – सूर्यास्त के बाद
👉 इस दिन निर्जला उपवास का विशेष महत्व है। महिलाएँ पूरी श्रद्धा से माता पार्वती और भगवान शिव की आराधना करती हैं।
🌸 हरतालिका तीज का महत्व
अखंड सौभाग्य का व्रत – यह व्रत विवाहित महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
मनचाहे वर की प्राप्ति – अविवाहित कन्याएँ इस व्रत को रखकर योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति करती हैं।
शिव-पार्वती विवाह स्मरण – मान्यता है कि इसी दिन माता पार्वती ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था।
सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की स्थिरता – व्रत रखने से परिवार में शांति और समृद्धि बनी रहती है।
🌙 ज्योतिषीय दृष्टिकोण
हरतालिका तीज भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आती है।
इस दिन चंद्रमा की स्थिति विशेष रूप से शुभ मानी जाती है।
महिलाएँ चंद्र दर्शन करके व्रत का समापन करती हैं।
यह तिथि शिव-पार्वती उपासना और वैवाहिक सुख की वृद्धि के लिए उत्तम है।
🙏 व्रत का फल
पति की लंबी आयु और स्वस्थ जीवन
दाम्पत्य जीवन में सामंजस्य और प्रेम
संतान सुख और परिवार की उन्नति
जीवन में सभी बाधाओं का निवारण
📖 हरतालिका तीज व्रत कथा
🌸 हरतालिका तीज कथा का आरंभ
प्राचीन काल में हिमवान (हिमालय राज) की पुत्री पार्वती अत्यंत सुंदर और गुणवान थीं। वे बचपन से ही भगवान शंकर को अपने पति रूप में पाने की अभिलाषा रखती थीं। किंतु उनके पिता हिमवान ने उनकी शादी भगवान विष्णु से करने का निश्चय कर लिया।
पार्वती जी को यह बात स्वीकार नहीं थी, क्योंकि उनका हृदय पहले ही भगवान शंकर के चरणों में समर्पित हो चुका था।
🌙 माता पार्वती की तपस्या
जब पार्वती जी ने पिता के इस निर्णय की सूचना सुनी, तो वे अत्यंत व्याकुल हो गईं। वे अपनी सखियों के साथ घने जंगल में चली गईं और वहीं रहकर कठोर तपस्या करने लगीं।
उन्होंने कई वर्षों तक केवल पत्तों, फल और जल पर निर्वाह किया।
बाद में उन्होंने जल और अन्न का त्याग कर केवल वायु सेवन से ही तपस्या जारी रखी।
यह तपस्या कठिन (हर) और आलिका (सखियों के साथ वन गमन) होने के कारण इसका नाम पड़ा हरतालिका।
🌸 भगवान शिव का प्रकट होना
माता पार्वती की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव उनके सामने प्रकट हुए और वरदान दिया –
“हे गौरी! मैं तुम्हारे अटूट प्रेम और तपस्या से अत्यंत प्रसन्न हूँ। अब मैं तुम्हें अपने अर्धांगिनी रूप में स्वीकार करता हूँ।”
इसी तपस्या और व्रत के प्रभाव से भगवान शंकर और माता पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ।
🙏 कथा का महत्व
माता पार्वती ने इस व्रत के माध्यम से मनचाहा वर प्राप्त किया।
यह व्रत महिलाओं को भी यही आशीर्वाद देता है कि वे योग्य जीवनसाथी और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति करें।
अविवाहित कन्याएँ इसे करती हैं तो उन्हें उत्तम पति मिलता है, और विवाहित स्त्रियाँ करती हैं तो उनके पति की दीर्घायु और परिवार की समृद्धि बनी रहती है।
🌼 कथा का धार्मिक संदेश
श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक – पार्वती जी की तरह यदि स्त्री अपने लक्ष्य और पति के लिए समर्पित रहती है, तो उसे निश्चित ही सफलता मिलती है।
त्याग और संयम का महत्व – इस कथा से यह शिक्षा मिलती है कि जीवन में तपस्या, धैर्य और संयम से ही बड़े लक्ष्य प्राप्त होते हैं।
शिव-पार्वती आदर्श दांपत्य – हिंदू धर्म में शिव-पार्वती को आदर्श दंपत्ति माना गया है, और इस व्रत के माध्यम से वही संबंध जीवन में स्थापित करने की प्रेरणा मिलती है।
🌺 कथा का संक्षेप (पाठ करने योग्य रूप में)
“हे देवियों! एक समय हिमवान की पुत्री पार्वती भगवान शंकर को पाने के लिए वन में कठोर तपस्या कर रही थीं। उनके पिता विष्णु से विवाह करना चाहते थे, परंतु माता ने सखियों के साथ वन गमन कर कठोर व्रत किया। अंततः उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। जो स्त्री इस व्रत को करती है, उसे भी अखंड सौभाग्य और मनचाहा वर प्राप्त होता है।”
🌙 हरतालिका तीज आरती (संक्षेप में)
आरती गाने से पूजा पूर्ण मानी जाती है।
“ॐ जय शिव पार्वती माता, जय जय शिव पार्वती माता,
तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता…”
🌸 हरतालिका तीज व्रत पूजा विधि
🪔 पूजा सामग्री
हरतालिका तीज व्रत की पूजा के लिए निम्न सामग्री चाहिए –
मिट्टी या सोने-चांदी की गणेश-शिव-पार्वती प्रतिमा
कलश (पानी से भरा हुआ, नारियल और आम के पत्तों सहित)
लाल चुनरी
सुहाग की सामग्री (चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, महावर, कंघी आदि)
रोली, चंदन, हल्दी, कुंकुम
पंचमेवा, फल, मिठाई
धूप, दीपक, घी/तेल, कपूर
मेहंदी, फूल, पान, सुपारी
पूजा थाली और आसन
🙏 पूजा विधि (Step by Step)
1. व्रत और संकल्प
सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
हाथ में जल और फूल लेकर संकल्प करें –
“मैं आज हरतालिका तीज का व्रत पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए करती हूँ।”
2. व्रत का नियम
पूरे दिन निर्जला या फलाहार व्रत रखें।
रातभर जागरण करने का नियम है।
व्रती स्त्री को कथा और आरती अवश्य करनी चाहिए।
3. पूजन स्थल की तैयारी
स्वच्छ स्थान पर चौक बनाकर कलश स्थापित करें।
उस पर लाल चुनरी बिछाकर भगवान शिव, पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें।
4. देवताओं का आवाहन
पहले कलश पूजा करें।
फिर भगवान गणेश की पूजा करके प्रसाद चढ़ाएँ।
इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें।
5. पूजन क्रम
रोली, चंदन, हल्दी, कुंकुम से तिलक करें।
फूल, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित करें।
सुहाग की सामग्री माता पार्वती को अर्पित करें।
दीपक और धूप जलाकर आरती करें।
6. व्रत कथा श्रवण
पूजा के बाद हरतालिका तीज व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
कथा के बाद सभी स्त्रियाँ एक-दूसरे को सुहाग सामग्री देकर आशीर्वाद लेती हैं।
7. जागरण और आरती
रातभर भजन-कीर्तन और जागरण का नियम है।
अंत में “ॐ जय शिव पार्वती माता” की आरती करें।
🌼 व्रत खोलने की विधि
अगले दिन सूर्योदय के बाद ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन कराएँ और दक्षिणा दें।
उसके बाद जल ग्रहण करके व्रत का समापन करें।
🌙 पूजा का महत्व
यह व्रत स्त्री को अखंड सौभाग्य और पति की लंबी उम्र का वरदान देता है।
अविवाहित कन्याओं को योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।
घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
🌸 हरतालिका तीज व्रत कथा, पूजा विधि, तिथि, महत्व और आरती (2025)
📌 प्रस्तावना
भारत त्योहारों की धरती है। यहाँ हर त्योहार का अपना विशेष महत्व है। हरतालिका तीज इन्हीं पावन पर्वों में से एक है, जिसे खासकर सुहागिन स्त्रियाँ और अविवाहित कन्याएँ पूरे श्रद्धा-भाव से मनाती हैं। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन की स्मृति में मनाया जाता है।
🗓️ हरतालिका तीज 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
तिथि – 27 अगस्त 2025 (बुधवार)
तृतीया तिथि प्रारंभ – 26 अगस्त 2025, रात 11:16 बजे
तृतीया तिथि समाप्त – 27 अगस्त 2025, रात 09:02 बजे
पूजन का शुभ मुहूर्त – 06:05 AM से 08:40 AM
👉 इस दिन महिलाएँ निर्जला व्रत रखती हैं और रातभर जागरण करती हैं।
🌼 हरतालिका तीज व्रत कथा (Hartalika Teej Vrat Katha)
पुराणों के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की थी। उनके पिता हिमवान ने उनका विवाह भगवान विष्णु से करने का निश्चय किया। यह सुनकर पार्वतीजी की सखी उन्हें जंगल में ले गईं और वहाँ एक गुफा में ले जाकर छुपा दिया।
वहाँ पार्वती जी ने रेत से शिवलिंग बनाकर कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति और निष्ठा देखकर भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। तभी से इस व्रत को हरतालिका तीज कहा जाता है।
🪔 पूजा सामग्री
हरतालिका तीज व्रत के लिए आवश्यक सामग्री –
शिव-पार्वती-गणेश प्रतिमा
कलश, नारियल, आम के पत्ते
लाल चुनरी
सुहाग सामग्री (सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, मेहंदी)
फल, मिठाई, पंचमेवा
दीपक, धूप, कपूर
पान, सुपारी, फूल
🙏 पूजा विधि (Step by Step)
प्रातः स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
चौक बनाकर कलश स्थापित करें।
शिव-पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें।
रोली, चंदन, हल्दी, फूल और सुहाग सामग्री अर्पित करें।
कथा का श्रवण करें।
रातभर जागरण करें और भजन-कीर्तन करें।
अगले दिन व्रत का समापन कर भोजन ग्रहण करें।
🌙 व्रत का महत्व
सुहागिन स्त्रियों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति।
पति की लंबी आयु और समृद्धि।
अविवाहित कन्याओं को मनचाहा वर।
घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि।
📖 पौराणिक मान्यता
यह व्रत पार्वती जी के 16 वें तप का प्रतीक है।
इसे करने से स्त्रियाँ सच्चे अर्थों में “सौभाग्यवती” कहलाती हैं।
यह व्रत शिव-पार्वती के अटूट प्रेम और मिलन की याद दिलाता है।
🎶 हरतालिका तीज आरती
“ॐ जय शिव पार्वती माता, सब सुख संपत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता।”
(पूरा आरती संग्रह PDF लिंक में दिया जा सकता है।)
💚 हरतालिका तीज की खास बातें
इस दिन महिलाएँ नए कपड़े पहनती हैं।
मेहंदी और अलंकरण का विशेष महत्व है।
एक-दूसरे को सुहाग सामग्री उपहार स्वरूप दी जाती है।
🌺 मेहंदी की डिजाइन और परंपरा
हरतालिका तीज पर हाथों और पैरों में मेहंदी रचाना शुभ माना जाता है। नई-नई डिज़ाइन जैसे –
अरेबिक मेहंदी
पारंपरिक भारतीय मेहंदी
फुलकारी डिजाइन
मंडला आर्ट
🎉 शुभकामनाएँ और बधाई संदेश
“आपके दाम्पत्य जीवन में सदैव प्रेम और सुख-शांति बनी रहे। शुभ हरतालिका तीज।”
“भगवान शिव-पार्वती का आशीर्वाद आप पर बना रहे। हैप्पी हरतालिका तीज 2025।”
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