हरतालिका तीज वà¥à¤°à¤¤ कथा 2025 | Hartalika Teej 2025 Vrat Katha, Pooja Vidhi, Aarti, Wishes & Importance
1. परिचय – हरतालिका तीज कà¥à¤¯à¤¾ है?
हरतालिका तीज हिंदू धरà¥à¤® का à¤à¤• पà¥à¤°à¤®à¥à¤– वà¥à¤°à¤¤ और परà¥à¤µ है, जिसे विशेषकर सà¥à¤¹à¤¾à¤—िन सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ और अविवाहित कनà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ बड़े शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ à¤à¤¾à¤µ से मनाती हैं। यह परà¥à¤µ à¤à¤—वान शिव और माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ के पवितà¥à¤° मिलन की सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿ में रखा जाता है। माना जाता है कि इस वà¥à¤°à¤¤ को रखने से सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯à¤µà¤¤à¥€ होने का वरदान मिलता है और अविवाहित कनà¥à¤¯à¤¾à¤“ं को मनचाहा वर पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होता है।
यह वà¥à¤°à¤¤ à¤à¤¾à¤¦à¥à¤°à¤ªà¤¦ मास के शà¥à¤•à¥à¤² पकà¥à¤· की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन महिलाà¤à¤‚ निरà¥à¤œà¤²à¤¾ उपवास रखती हैं, यानी बिना जल गà¥à¤°à¤¹à¤£ किठपूरे दिन पूजा करती हैं। पूजा में माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ और à¤à¤—वान शिव की मिटà¥à¤Ÿà¥€ की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤®à¤¾ बनाकर उनकी विधिवत पूजा की जाती है।
2. हरतालिका तीज 2025 तिथि व शà¥à¤ मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤
हरतालिका तीज 2025 की तिथि
तिथि – à¤à¤¾à¤¦à¥à¤°à¤ªà¤¦ मास, शà¥à¤•à¥à¤² पकà¥à¤·, तृतीया
दिनांक – 27 अगसà¥à¤¤ 2025 (बà¥à¤§à¤µà¤¾à¤°)
वà¥à¤°à¤¤ आरंठ– पà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤ƒ काल से
पूजा का शà¥à¤ मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤ – पà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤ƒà¤•ालीन समय सबसे शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤
पंचांग विवरण (2025)
तृतीया तिथि पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚ठ– 26 अगसà¥à¤¤ 2025, रातà¥à¤°à¤¿ 11:58 बजे
तृतीया तिथि समापà¥à¤¤ – 27 अगसà¥à¤¤ 2025, रातà¥à¤°à¤¿ 09:12 बजे
👉 इस पà¥à¤°à¤•ार वà¥à¤°à¤¤ और पूजा का मà¥à¤–à¥à¤¯ दिन 27 अगसà¥à¤¤ 2025, बà¥à¤§à¤µà¤¾à¤° को मनाया जाà¤à¤—ा।
3. हरतालिका तीज का महतà¥à¤µ
हरतालिका तीज वà¥à¤°à¤¤ का महतà¥à¤µ अतà¥à¤¯à¤‚त गहरा है। मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ है कि इस वà¥à¤°à¤¤ को रखने से विवाहित सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का वैवाहिक जीवन सà¥à¤–मय रहता है और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अखंड सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ का वरदान मिलता है। अविवाहित कनà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ यदि यह वà¥à¤°à¤¤ करती हैं तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ योगà¥à¤¯ व मनचाहा पति पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होता है।
धारà¥à¤®à¤¿à¤• दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से महतà¥à¤µ
यह वà¥à¤°à¤¤ माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ के तप और समरà¥à¤ªà¤£ की सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿ में है।
à¤à¤—वान शिव ने माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ की तपसà¥à¤¯à¤¾ से पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ होकर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पतà¥à¤¨à¥€ रूप में सà¥à¤µà¥€à¤•ार किया।
इस दिन महिलाà¤à¤‚ उसी à¤à¤¾à¤µ से पूजा करती हैं।
आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से महतà¥à¤µ
उपवास आतà¥à¤®à¤¸à¤‚यम और साधना का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है।
यह वà¥à¤°à¤¤ साधक को मन और आतà¥à¤®à¤¾ को शà¥à¤¦à¥à¤§ करने का अवसर देता है।
सामाजिक महतà¥à¤µ
यह परà¥à¤µ महिलाओं के लिठà¤à¤•ता और मेल-जोल का अवसर लाता है।
मेहंदी, गीत-संगीत और पूजा से वातावरण उतà¥à¤¸à¤µà¤®à¤¯ हो जाता है।
🌸 हरतालिका तीज वà¥à¤°à¤¤ कथा (Hartalika Teej Vrat Katha)
1. कथा की पृषà¥à¤ à¤à¥‚मि
हरतालिका तीज की कथा माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ और à¤à¤—वान शिव के दिवà¥à¤¯ मिलन से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ हà¥à¤ˆ है। यह कथा इस परà¥à¤µ का सबसे पà¥à¤°à¤®à¥à¤– और आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• हिसà¥à¤¸à¤¾ मानी जाती है। कथा के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ ने à¤à¤—वान शिव को पति रूप में पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने के लिठकठोर तपसà¥à¤¯à¤¾ की थी।
2. हरतालिका वà¥à¤°à¤¤ कथा
पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ काल में हिमालय की कनà¥à¤¯à¤¾ पारà¥à¤µà¤¤à¥€ ने यह निशà¥à¤šà¤¯ किया कि वे केवल à¤à¤—वान शिव को ही पति रूप में सà¥à¤µà¥€à¤•ार करेंगी। लेकिन उनके पिता हिमवान उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤—वान विषà¥à¤£à¥ के साथ विवाह के लिठतैयार कर रहे थे।
जब पारà¥à¤µà¤¤à¥€ को इस बात का पता चला तो वे अतà¥à¤¯à¤‚त वà¥à¤¯à¤¾à¤•à¥à¤² हो उठीं। वे अपने सखियों के साथ वन में चली गईं और वहाठकठोर तपसà¥à¤¯à¤¾ करने लगीं। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कई वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ तक कठोर वà¥à¤°à¤¤ रखा और कठिनाइयों का सामना किया।
उनकी तपसà¥à¤¯à¤¾ देखकर सà¤à¥€ देवता, ऋषि और अपà¥à¤¸à¤°à¤¾à¤à¤‚ आशà¥à¤šà¤°à¥à¤¯à¤šà¤•ित रह गà¤à¥¤ अंततः उनकी निषà¥à¤ ा और à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ से पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ होकर à¤à¤—वान शिव ने माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ को अपनी पतà¥à¤¨à¥€ रूप में सà¥à¤µà¥€à¤•ार किया।
3. कथा का विवरण
कथा के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, जब हिमवान ने अपनी पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ पारà¥à¤µà¤¤à¥€ के विवाह का निरà¥à¤£à¤¯ à¤à¤—वान विषà¥à¤£à¥ के साथ किया, तब पारà¥à¤µà¤¤à¥€ अतà¥à¤¯à¤‚त दà¥à¤–ी हà¥à¤ˆà¤‚। वे अपनी सखियों के साथ घनघोर जंगल में चली गईं। वहाठउनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने निरà¥à¤œà¤²à¤¾ वà¥à¤°à¤¤ रखा और केवल à¤à¤—वान शिव का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ करती रहीं।
उनकी इस तपसà¥à¤¯à¤¾ से धरती, आकाश और पाताल तक में हलचल मच गई। अंततः à¤à¤—वान शिव सà¥à¤µà¤¯à¤‚ उनके सामने पà¥à¤°à¤•ट हà¥à¤ और कहा –
“हे देवी, तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥€ तपसà¥à¤¯à¤¾ और à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ से मैं पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ हूà¤à¥¤ मैं तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡à¤‚ पतà¥à¤¨à¥€ रूप में सà¥à¤µà¥€à¤•ार करता हूà¤à¥¤â€
उस दिन से यह वà¥à¤°à¤¤ “हरतालिका तीज” के नाम से पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ हो गया।
“हर” का अरà¥à¤¥ है – à¤à¤—वान शिव।
“तालिका” का अरà¥à¤¥ है – सखियाठ(जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने पारà¥à¤µà¤¤à¥€ को जंगल ले जाकर विवाह से बचाया)।
इस पà¥à¤°à¤•ार इस वà¥à¤°à¤¤ को हरतालिका कहा गया।
4. धारà¥à¤®à¤¿à¤• महतà¥à¤µ
इस कथा से यह शिकà¥à¤·à¤¾ मिलती है कि सचà¥à¤šà¥€ शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾, à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ और संकलà¥à¤ª से à¤à¤—वान अवशà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ होते हैं। माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ के तप और तà¥à¤¯à¤¾à¤— ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ शिव के समान वर पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किया। यही कारण है कि इस दिन सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤ वà¥à¤°à¤¤ रखकर माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ की तरह अखंड सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ और शिव-समान पति की कामना करती हैं।
5. कथा का संकà¥à¤·à¤¿à¤ªà¥à¤¤ रूप (सरल à¤à¤¾à¤·à¤¾ में)
हिमवान ने पारà¥à¤µà¤¤à¥€ का विवाह विषà¥à¤£à¥ से तय किया।
पारà¥à¤µà¤¤à¥€ अपनी सखियों के साथ वन में चली गईं।
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने शिव को पाने के लिठकठोर तपसà¥à¤¯à¤¾ की।
à¤à¤—वान शिव ने उनकी तपसà¥à¤¯à¤¾ से पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ होकर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पतà¥à¤¨à¥€ रूप में सà¥à¤µà¥€à¤•ार किया।
तà¤à¥€ से यह वà¥à¤°à¤¤ “हरतालिका तीज” कहलाया और हर साल सà¥à¤¹à¤¾à¤—िन सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤ इसे करती हैं।
6. हरतालिका तीज से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ विशेष मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾
इस दिन उपवास करने से सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को अखंड सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होता है।
अविवाहित कनà¥à¤¯à¤¾à¤à¤ यह वà¥à¤°à¤¤ करके मनचाहा वर पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर सकती हैं।
इस वà¥à¤°à¤¤ की कथा सà¥à¤¨à¤¨à¤¾ और सà¥à¤¨à¤¾à¤¨à¤¾ दोनों ही पà¥à¤£à¥à¤¯à¤¦à¤¾à¤¯à¥€ माना जाता है।
कथा के बाद महिलाà¤à¤‚ “हरतालिका आरती” करती हैं और माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€-शिव का सà¥à¤®à¤°à¤£ करती हैं।
7. हरतालिका वà¥à¤°à¤¤ कथा का सामाजिक पकà¥à¤·
यह कथा केवल धारà¥à¤®à¤¿à¤• दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से ही नहीं बलà¥à¤•ि सामाजिक दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से à¤à¥€ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है। यह हमें यह सिखाती है कि सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ की इचà¥à¤›à¤¾ का à¤à¥€ आदर होना चाहिà¤à¥¤ माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ ने अपनी पसंद के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° पति चà¥à¤¨à¤¨à¥‡ के लिठकठिन तपसà¥à¤¯à¤¾ की और अंततः उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ वही मिला।
🌸 हरतालिका तीज पूजा विधि (Hartalika Teej Pooja Vidhi)
हरतालिका तीज का वà¥à¤°à¤¤ केवल कथा सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ और उपवास रखने तक सीमित नहीं है, बलà¥à¤•ि इसमें विधिवत पूजा का विशेष महतà¥à¤µ है। इस दिन महिलाà¤à¤ माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ और à¤à¤—वान शिव की पूजा करती हैं और अखंड सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ की कामना करती हैं।
1. वà¥à¤°à¤¤ का संकलà¥à¤ª (Sankalp)
सà¥à¤¬à¤¹ सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ करके महिलाà¤à¤ यह संकलà¥à¤ª लेती हैं –
“मैं माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ और à¤à¤—वान शिव की कृपा पाने के लिठनिरà¥à¤œà¤²à¤¾ हरतालिका तीज वà¥à¤°à¤¤ रखूà¤à¤—ी। यह वà¥à¤°à¤¤ मà¥à¤à¥‡ अखंड सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ और सà¥à¤–-समृदà¥à¤§à¤¿ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करे।”
2. पूजा सामगà¥à¤°à¥€ (Samagri)
हरतालिका तीज की पूजा के लिठनिमà¥à¤¨ सामगà¥à¤°à¥€ की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है –
à¤à¤—वान शिव और माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤®à¤¾ या चितà¥à¤°
मिटà¥à¤Ÿà¥€ से बने शिव-पारà¥à¤µà¤¤à¥€-गणेश का सà¥à¤µà¤°à¥‚प (शिवलिंग à¤à¥€ रखा जा सकता है)
कलश (पानी, आमà¥à¤° पलà¥à¤²à¤µ और नारियल सहित)
लाल चà¥à¤¨à¤°à¥€, साड़ी और शà¥à¤°à¥ƒà¤‚गार सामगà¥à¤°à¥€
चंदन, रोली, हलà¥à¤¦à¥€, कà¥à¤‚कà¥à¤®
बेलपतà¥à¤°, धतूरा और फूल
मेहंदी, सिंदूर और बिंदी
फल, फूल, पंचामृत, दूध और दही
गनà¥à¤¨à¤¾, हलà¥à¤¦à¥€ की गांठ, सà¥à¤ªà¤¾à¤°à¥€, नारियल
दीपक, अगरबतà¥à¤¤à¥€ और धूपबतà¥à¤¤à¥€
मिठाई और पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ (खासकर ghevar या हलवा-पूरी)
3. पूजा सà¥à¤¥à¤² की तैयारी
घर के उतà¥à¤¤à¤°-पूरà¥à¤µ (ईशान कोण) दिशा में साफ-सफाई करके पूजा सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ तैयार करें।
रंगोली बनाकर पूजा सà¥à¤¥à¤² को सजाà¤à¤à¥¤
à¤à¤• चौकी पर लाल कपड़ा बिछाà¤à¤ और उस पर माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ और à¤à¤—वान शिव की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤®à¤¾ या मिटà¥à¤Ÿà¥€ का सà¥à¤µà¤°à¥‚प सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करें।
4. पूजा की विधि (Step-by-Step Pooja Vidhi)
(a) कलश सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾
à¤à¤• जलà¤à¤°à¤¾ कलश रखें, उस पर आमà¥à¤° पलà¥à¤²à¤µ और नारियल सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करें।
कलश को पूजा का साकà¥à¤·à¥€ मानकर à¤à¤—वान गणेश का आहà¥à¤µà¤¾à¤¨ करें।
(b) शिव-पारà¥à¤µà¤¤à¥€-गणेश सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾
मिटà¥à¤Ÿà¥€ से बने शिव-पारà¥à¤µà¤¤à¥€ और गणेशजी को सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करें।
लाल चà¥à¤¨à¤°à¥€ से सजाà¤à¤ और शà¥à¤°à¥ƒà¤‚गार सामगà¥à¤°à¥€ अरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ करें।
(c) पूजन कà¥à¤°à¤®
दीपक और अगरबतà¥à¤¤à¥€ जलाà¤à¤à¥¤
गणेशजी की पूजा करके उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बाधा-विनाशक के रूप में सà¥à¤®à¤°à¤£ करें।
à¤à¤—वान शिव को बेलपतà¥à¤°, धतूरा, à¤à¤¾à¤‚ग, गंगा जल, दूध और चंदन अरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ करें।
माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ को शà¥à¤°à¥ƒà¤‚गार सामगà¥à¤°à¥€ जैसे मेहंदी, सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, काजल, बिछिया आदि अरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ करें।
कथा का वाचन करें या सà¥à¤¨à¥‡à¤‚।
“हरतालिका तीज वà¥à¤°à¤¤ कथा” समापà¥à¤¤ होने के बाद महिलाà¤à¤ à¤à¤•-दूसरे को सà¥à¤¹à¤¾à¤— सामगà¥à¤°à¥€ à¤à¥‡à¤‚ट करती हैं।
5. पूजा का समय
पà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤ƒà¤•ालीन पूजा – सà¥à¤¬à¤¹ सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ कर संकलà¥à¤ª लें।
संधà¥à¤¯à¤¾ पूजा – सूरà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¥à¤¤ के समय कथा और आरती करें।
रातà¥à¤°à¤¿ में माता-पारà¥à¤µà¤¤à¥€-शिव का जागरण करने का विशेष महतà¥à¤µ है।
6. वà¥à¤°à¤¤ का नियम
यह वà¥à¤°à¤¤ निरà¥à¤œà¤²à¤¾ होता है यानी जल तक का सेवन नहीं किया जाता।
केवल रातà¥à¤°à¤¿ में पूजा और कथा के बाद वà¥à¤°à¤¤ खोला जाता है।
महिलाà¤à¤ अखंड सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ की कामना करती हैं जबकि अविवाहित कनà¥à¤¯à¤¾à¤à¤ मनचाहे वर के लिठयह वà¥à¤°à¤¤ रखती हैं।
7. हरतालिका आरती
पूजा के अंत में “हरतालिका आरती” गाई जाती है।
आरती में माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ और à¤à¤—वान शिव का सà¥à¤®à¤°à¤£ कर सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ और आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ की पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ की जाती है।
8. विशेष परंपराà¤à¤
वà¥à¤°à¤¤ रखने वाली महिलाà¤à¤ à¤à¤•-दूसरे को सिंदूर और सà¥à¤¹à¤¾à¤— सामगà¥à¤°à¥€ देती हैं।
मेहंदी रचाना इस दिन का पà¥à¤°à¤®à¥à¤– आकरà¥à¤·à¤£ है।
रातà¤à¤° जागरण और à¤à¤œà¤¨-कीरà¥à¤¤à¤¨ करने का à¤à¥€ महतà¥à¤µ है।
9. पूजा का फल
सà¥à¤¹à¤¾à¤—िन महिलाओं को अखंड सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ और पति की लंबी आयॠपà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होती है।
अविवाहित कनà¥à¤¯à¤¾à¤“ं को योगà¥à¤¯ वर की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ होती है।
परिवार में सà¥à¤–-समृदà¥à¤§à¤¿ और शांति बनी रहती है।
🌙 हरतालिका तीज 2025: तिथि, मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤ और महतà¥à¤µ
📅 हरतालिका तीज 2025 की तिथि
तारीख – 27 अगसà¥à¤¤ 2025, बà¥à¤§à¤µà¤¾à¤°
वà¥à¤°à¤¤ पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚ठ– 26 अगसà¥à¤¤ 2025 रात 11:18 बजे से
वà¥à¤°à¤¤ समापà¥à¤¤à¤¿ – 27 अगसà¥à¤¤ 2025 रात 09:35 बजे तक
Ⱐपूजा का शà¥à¤ मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤
पà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤ƒà¤•ालीन पूजा समय – सà¥à¤¬à¤¹ 05:30 बजे से 07:45 बजे तक
संधà¥à¤¯à¤¾ पूजन का समय – शाम 06:45 बजे से 08:15 बजे तक
आरती à¤à¤µà¤‚ कथा का समय – सूरà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¥à¤¤ के बाद
👉 इस दिन निरà¥à¤œà¤²à¤¾ उपवास का विशेष महतà¥à¤µ है। महिलाà¤à¤ पूरी शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ से माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ और à¤à¤—वान शिव की आराधना करती हैं।
🌸 हरतालिका तीज का महतà¥à¤µ
अखंड सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ का वà¥à¤°à¤¤ – यह वà¥à¤°à¤¤ विवाहित महिलाओं के लिठअखंड सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• माना जाता है।
मनचाहे वर की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ – अविवाहित कनà¥à¤¯à¤¾à¤à¤ इस वà¥à¤°à¤¤ को रखकर योगà¥à¤¯ जीवनसाथी की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ करती हैं।
शिव-पारà¥à¤µà¤¤à¥€ विवाह सà¥à¤®à¤°à¤£ – मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ है कि इसी दिन माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ ने कठोर तपसà¥à¤¯à¤¾ कर à¤à¤—वान शिव को पति रूप में पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ किया था।
सà¥à¤–-समृदà¥à¤§à¤¿ और वैवाहिक जीवन की सà¥à¤¥à¤¿à¤°à¤¤à¤¾ – वà¥à¤°à¤¤ रखने से परिवार में शांति और समृदà¥à¤§à¤¿ बनी रहती है।
🌙 जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤·à¥€à¤¯ दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण
हरतालिका तीज à¤à¤¾à¤¦à¥à¤°à¤ªà¤¦ माह के शà¥à¤•à¥à¤² पकà¥à¤· की तृतीया तिथि को आती है।
इस दिन चंदà¥à¤°à¤®à¤¾ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ विशेष रूप से शà¥à¤ मानी जाती है।
महिलाà¤à¤ चंदà¥à¤° दरà¥à¤¶à¤¨ करके वà¥à¤°à¤¤ का समापन करती हैं।
यह तिथि शिव-पारà¥à¤µà¤¤à¥€ उपासना और वैवाहिक सà¥à¤– की वृदà¥à¤§à¤¿ के लिठउतà¥à¤¤à¤® है।
🙠वà¥à¤°à¤¤ का फल
पति की लंबी आयॠऔर सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ जीवन
दामà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¯ जीवन में सामंजसà¥à¤¯ और पà¥à¤°à¥‡à¤®
संतान सà¥à¤– और परिवार की उनà¥à¤¨à¤¤à¤¿
जीवन में सà¤à¥€ बाधाओं का निवारण
📖 हरतालिका तीज वà¥à¤°à¤¤ कथा
🌸 हरतालिका तीज कथा का आरंà¤
पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ काल में हिमवान (हिमालय राज) की पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ पारà¥à¤µà¤¤à¥€ अतà¥à¤¯à¤‚त सà¥à¤‚दर और गà¥à¤£à¤µà¤¾à¤¨ थीं। वे बचपन से ही à¤à¤—वान शंकर को अपने पति रूप में पाने की अà¤à¤¿à¤²à¤¾à¤·à¤¾ रखती थीं। किंतॠउनके पिता हिमवान ने उनकी शादी à¤à¤—वान विषà¥à¤£à¥ से करने का निशà¥à¤šà¤¯ कर लिया।
पारà¥à¤µà¤¤à¥€ जी को यह बात सà¥à¤µà¥€à¤•ार नहीं थी, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनका हृदय पहले ही à¤à¤—वान शंकर के चरणों में समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ हो चà¥à¤•ा था।
🌙 माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ की तपसà¥à¤¯à¤¾
जब पारà¥à¤µà¤¤à¥€ जी ने पिता के इस निरà¥à¤£à¤¯ की सूचना सà¥à¤¨à¥€, तो वे अतà¥à¤¯à¤‚त वà¥à¤¯à¤¾à¤•à¥à¤² हो गईं। वे अपनी सखियों के साथ घने जंगल में चली गईं और वहीं रहकर कठोर तपसà¥à¤¯à¤¾ करने लगीं।
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कई वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ तक केवल पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚, फल और जल पर निरà¥à¤µà¤¾à¤¹ किया।
बाद में उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने जल और अनà¥à¤¨ का तà¥à¤¯à¤¾à¤— कर केवल वायॠसेवन से ही तपसà¥à¤¯à¤¾ जारी रखी।
यह तपसà¥à¤¯à¤¾ कठिन (हर) और आलिका (सखियों के साथ वन गमन) होने के कारण इसका नाम पड़ा हरतालिका।
🌸 à¤à¤—वान शिव का पà¥à¤°à¤•ट होना
माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ की कठोर तपसà¥à¤¯à¤¾ से पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ होकर à¤à¤—वान शिव उनके सामने पà¥à¤°à¤•ट हà¥à¤ और वरदान दिया –
“हे गौरी! मैं तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ अटूट पà¥à¤°à¥‡à¤® और तपसà¥à¤¯à¤¾ से अतà¥à¤¯à¤‚त पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ हूà¤à¥¤ अब मैं तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपने अरà¥à¤§à¤¾à¤‚गिनी रूप में सà¥à¤µà¥€à¤•ार करता हूà¤à¥¤â€
इसी तपसà¥à¤¯à¤¾ और वà¥à¤°à¤¤ के पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ से à¤à¤—वान शंकर और माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ का दिवà¥à¤¯ विवाह संपनà¥à¤¨ हà¥à¤†à¥¤
🙠कथा का महतà¥à¤µ
माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ ने इस वà¥à¤°à¤¤ के माधà¥à¤¯à¤® से मनचाहा वर पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ किया।
यह वà¥à¤°à¤¤ महिलाओं को à¤à¥€ यही आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ देता है कि वे योगà¥à¤¯ जीवनसाथी और अखंड सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ करें।
अविवाहित कनà¥à¤¯à¤¾à¤à¤ इसे करती हैं तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ उतà¥à¤¤à¤® पति मिलता है, और विवाहित सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤ करती हैं तो उनके पति की दीरà¥à¤˜à¤¾à¤¯à¥ और परिवार की समृदà¥à¤§à¤¿ बनी रहती है।
🌼 कथा का धारà¥à¤®à¤¿à¤• संदेश
शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ और विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• – पारà¥à¤µà¤¤à¥€ जी की तरह यदि सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ अपने लकà¥à¤·à¥à¤¯ और पति के लिठसमरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ रहती है, तो उसे निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ ही सफलता मिलती है।
तà¥à¤¯à¤¾à¤— और संयम का महतà¥à¤µ – इस कथा से यह शिकà¥à¤·à¤¾ मिलती है कि जीवन में तपसà¥à¤¯à¤¾, धैरà¥à¤¯ और संयम से ही बड़े लकà¥à¤·à¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होते हैं।
शिव-पारà¥à¤µà¤¤à¥€ आदरà¥à¤¶ दांपतà¥à¤¯ – हिंदू धरà¥à¤® में शिव-पारà¥à¤µà¤¤à¥€ को आदरà¥à¤¶ दंपतà¥à¤¤à¤¿ माना गया है, और इस वà¥à¤°à¤¤ के माधà¥à¤¯à¤® से वही संबंध जीवन में सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करने की पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ मिलती है।
🌺 कथा का संकà¥à¤·à¥‡à¤ª (पाठकरने योगà¥à¤¯ रूप में)
“हे देवियों! à¤à¤• समय हिमवान की पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ पारà¥à¤µà¤¤à¥€ à¤à¤—वान शंकर को पाने के लिठवन में कठोर तपसà¥à¤¯à¤¾ कर रही थीं। उनके पिता विषà¥à¤£à¥ से विवाह करना चाहते थे, परंतॠमाता ने सखियों के साथ वन गमन कर कठोर वà¥à¤°à¤¤ किया। अंततः उनकी à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ से पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ होकर à¤à¤—वान शंकर ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पतà¥à¤¨à¥€ रूप में सà¥à¤µà¥€à¤•ार किया। जो सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ इस वà¥à¤°à¤¤ को करती है, उसे à¤à¥€ अखंड सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ और मनचाहा वर पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होता है।”
🌙 हरतालिका तीज आरती (संकà¥à¤·à¥‡à¤ª में)
आरती गाने से पूजा पूरà¥à¤£ मानी जाती है।
“ॠजय शिव पारà¥à¤µà¤¤à¥€ माता, जय जय शिव पारà¥à¤µà¤¤à¥€ माता,
तà¥à¤®à¤•ो निसदिन सेवत, हर विषà¥à¤£à¥ विधाता…”
🌸 हरतालिका तीज वà¥à¤°à¤¤ पूजा विधि
🪔 पूजा सामगà¥à¤°à¥€
हरतालिका तीज वà¥à¤°à¤¤ की पूजा के लिठनिमà¥à¤¨ सामगà¥à¤°à¥€ चाहिठ–
मिटà¥à¤Ÿà¥€ या सोने-चांदी की गणेश-शिव-पारà¥à¤µà¤¤à¥€ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤®à¤¾
कलश (पानी से à¤à¤°à¤¾ हà¥à¤†, नारियल और आम के पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ सहित)
लाल चà¥à¤¨à¤°à¥€
सà¥à¤¹à¤¾à¤— की सामगà¥à¤°à¥€ (चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, महावर, कंघी आदि)
रोली, चंदन, हलà¥à¤¦à¥€, कà¥à¤‚कà¥à¤®
पंचमेवा, फल, मिठाई
धूप, दीपक, घी/तेल, कपूर
मेहंदी, फूल, पान, सà¥à¤ªà¤¾à¤°à¥€
पूजा थाली और आसन
🙠पूजा विधि (Step by Step)
1. वà¥à¤°à¤¤ और संकलà¥à¤ª
सà¥à¤¬à¤¹ सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ करके सà¥à¤µà¤šà¥à¤› वसà¥à¤¤à¥à¤° धारण करें।
हाथ में जल और फूल लेकर संकलà¥à¤ª करें –
“मैं आज हरतालिका तीज का वà¥à¤°à¤¤ पति की लंबी आयॠऔर अखंड सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ के लिठकरती हूà¤à¥¤â€
2. वà¥à¤°à¤¤ का नियम
पूरे दिन निरà¥à¤œà¤²à¤¾ या फलाहार वà¥à¤°à¤¤ रखें।
रातà¤à¤° जागरण करने का नियम है।
वà¥à¤°à¤¤à¥€ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ को कथा और आरती अवशà¥à¤¯ करनी चाहिà¤à¥¤
3. पूजन सà¥à¤¥à¤² की तैयारी
सà¥à¤µà¤šà¥à¤› सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर चौक बनाकर कलश सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करें।
उस पर लाल चà¥à¤¨à¤°à¥€ बिछाकर à¤à¤—वान शिव, पारà¥à¤µà¤¤à¥€ और गणेश जी की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤®à¤¾ सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करें।
4. देवताओं का आवाहन
पहले कलश पूजा करें।
फिर à¤à¤—वान गणेश की पूजा करके पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ चढ़ाà¤à¤à¥¤
इसके बाद à¤à¤—वान शिव और माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ की पूजा करें।
5. पूजन कà¥à¤°à¤®
रोली, चंदन, हलà¥à¤¦à¥€, कà¥à¤‚कà¥à¤® से तिलक करें।
फूल, अकà¥à¤·à¤¤, फल और मिठाई अरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ करें।
सà¥à¤¹à¤¾à¤— की सामगà¥à¤°à¥€ माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ को अरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ करें।
दीपक और धूप जलाकर आरती करें।
6. वà¥à¤°à¤¤ कथा शà¥à¤°à¤µà¤£
पूजा के बाद हरतालिका तीज वà¥à¤°à¤¤ कथा सà¥à¤¨à¥‡à¤‚ या पढ़ें।
कथा के बाद सà¤à¥€ सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤ à¤à¤•-दूसरे को सà¥à¤¹à¤¾à¤— सामगà¥à¤°à¥€ देकर आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ लेती हैं।
7. जागरण और आरती
रातà¤à¤° à¤à¤œà¤¨-कीरà¥à¤¤à¤¨ और जागरण का नियम है।
अंत में “ॠजय शिव पारà¥à¤µà¤¤à¥€ माता†की आरती करें।
🌼 वà¥à¤°à¤¤ खोलने की विधि
अगले दिन सूरà¥à¤¯à¥‹à¤¦à¤¯ के बाद बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¤£à¥‹à¤‚ या जरूरतमंदों को à¤à¥‹à¤œà¤¨ कराà¤à¤ और दकà¥à¤·à¤¿à¤£à¤¾ दें।
उसके बाद जल गà¥à¤°à¤¹à¤£ करके वà¥à¤°à¤¤ का समापन करें।
🌙 पूजा का महतà¥à¤µ
यह वà¥à¤°à¤¤ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ को अखंड सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ और पति की लंबी उमà¥à¤° का वरदान देता है।
अविवाहित कनà¥à¤¯à¤¾à¤“ं को योगà¥à¤¯ जीवनसाथी की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ होती है।
घर-परिवार में सà¥à¤–, शांति और समृदà¥à¤§à¤¿ बनी रहती है।
🌸 हरतालिका तीज वà¥à¤°à¤¤ कथा, पूजा विधि, तिथि, महतà¥à¤µ और आरती (2025)
📌 पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾
à¤à¤¾à¤°à¤¤ तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤°à¥‹à¤‚ की धरती है। यहाठहर तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤° का अपना विशेष महतà¥à¤µ है। हरतालिका तीज इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ पावन परà¥à¤µà¥‹à¤‚ में से à¤à¤• है, जिसे खासकर सà¥à¤¹à¤¾à¤—िन सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤ और अविवाहित कनà¥à¤¯à¤¾à¤à¤ पूरे शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾-à¤à¤¾à¤µ से मनाती हैं। यह परà¥à¤µ à¤à¤—वान शिव और माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ के मिलन की सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿ में मनाया जाता है।
ðŸ—“ï¸ à¤¹à¤°à¤¤à¤¾à¤²à¤¿à¤•à¤¾ तीज 2025 की तिथि और शà¥à¤ मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤
तिथि – 27 अगसà¥à¤¤ 2025 (बà¥à¤§à¤µà¤¾à¤°)
तृतीया तिथि पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚ठ– 26 अगसà¥à¤¤ 2025, रात 11:16 बजे
तृतीया तिथि समापà¥à¤¤ – 27 अगसà¥à¤¤ 2025, रात 09:02 बजे
पूजन का शà¥à¤ मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤ – 06:05 AM से 08:40 AM
👉 इस दिन महिलाà¤à¤ निरà¥à¤œà¤²à¤¾ वà¥à¤°à¤¤ रखती हैं और रातà¤à¤° जागरण करती हैं।
🌼 हरतालिका तीज वà¥à¤°à¤¤ कथा (Hartalika Teej Vrat Katha)
पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥‹à¤‚ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, माता पारà¥à¤µà¤¤à¥€ ने à¤à¤—वान शिव को पति रूप में पाने के लिठघोर तपसà¥à¤¯à¤¾ की थी। उनके पिता हिमवान ने उनका विवाह à¤à¤—वान विषà¥à¤£à¥ से करने का निशà¥à¤šà¤¯ किया। यह सà¥à¤¨à¤•र पारà¥à¤µà¤¤à¥€à¤œà¥€ की सखी उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ जंगल में ले गईं और वहाठà¤à¤• गà¥à¤«à¤¾ में ले जाकर छà¥à¤ªà¤¾ दिया।
वहाठपारà¥à¤µà¤¤à¥€ जी ने रेत से शिवलिंग बनाकर कठोर तपसà¥à¤¯à¤¾ की। उनकी à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ और निषà¥à¤ ा देखकर à¤à¤—वान शिव पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ हà¥à¤ और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पतà¥à¤¨à¥€ के रूप में सà¥à¤µà¥€à¤•ार किया। तà¤à¥€ से इस वà¥à¤°à¤¤ को हरतालिका तीज कहा जाता है।
🪔 पूजा सामगà¥à¤°à¥€
हरतालिका तीज वà¥à¤°à¤¤ के लिठआवशà¥à¤¯à¤• सामगà¥à¤°à¥€ –
शिव-पारà¥à¤µà¤¤à¥€-गणेश पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤®à¤¾
कलश, नारियल, आम के पतà¥à¤¤à¥‡
लाल चà¥à¤¨à¤°à¥€
सà¥à¤¹à¤¾à¤— सामगà¥à¤°à¥€ (सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, मेहंदी)
फल, मिठाई, पंचमेवा
दीपक, धूप, कपूर
पान, सà¥à¤ªà¤¾à¤°à¥€, फूल
🙠पूजा विधि (Step by Step)
पà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤ƒ सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ करके वà¥à¤°à¤¤ का संकलà¥à¤ª लें।
चौक बनाकर कलश सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करें।
शिव-पारà¥à¤µà¤¤à¥€ और गणेश जी की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤®à¤¾ सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करें।
रोली, चंदन, हलà¥à¤¦à¥€, फूल और सà¥à¤¹à¤¾à¤— सामगà¥à¤°à¥€ अरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ करें।
कथा का शà¥à¤°à¤µà¤£ करें।
रातà¤à¤° जागरण करें और à¤à¤œà¤¨-कीरà¥à¤¤à¤¨ करें।
अगले दिन वà¥à¤°à¤¤ का समापन कर à¤à¥‹à¤œà¤¨ गà¥à¤°à¤¹à¤£ करें।
🌙 वà¥à¤°à¤¤ का महतà¥à¤µ
सà¥à¤¹à¤¾à¤—िन सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को अखंड सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿à¥¤
पति की लंबी आयॠऔर समृदà¥à¤§à¤¿à¥¤
अविवाहित कनà¥à¤¯à¤¾à¤“ं को मनचाहा वर।
घर-परिवार में सà¥à¤–-शांति और समृदà¥à¤§à¤¿à¥¤
📖 पौराणिक मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾
यह वà¥à¤°à¤¤ पारà¥à¤µà¤¤à¥€ जी के 16 वें तप का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है।
इसे करने से सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤ सचà¥à¤šà¥‡ अरà¥à¤¥à¥‹à¤‚ में “सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯à¤µà¤¤à¥€” कहलाती हैं।
यह वà¥à¤°à¤¤ शिव-पारà¥à¤µà¤¤à¥€ के अटूट पà¥à¤°à¥‡à¤® और मिलन की याद दिलाता है।
🎶 हरतालिका तीज आरती
“ॠजय शिव पारà¥à¤µà¤¤à¥€ माता, सब सà¥à¤– संपतà¥à¤¤à¤¿ दाता।
जो कोई तà¥à¤®à¤•ो धà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¤¾, मनवांछित फल पाता।”
(पूरा आरती संगà¥à¤°à¤¹ PDF लिंक में दिया जा सकता है।)
💚 हरतालिका तीज की खास बातें
इस दिन महिलाà¤à¤ नठकपड़े पहनती हैं।
मेहंदी और अलंकरण का विशेष महतà¥à¤µ है।
à¤à¤•-दूसरे को सà¥à¤¹à¤¾à¤— सामगà¥à¤°à¥€ उपहार सà¥à¤µà¤°à¥‚प दी जाती है।
🌺 मेहंदी की डिजाइन और परंपरा
हरतालिका तीज पर हाथों और पैरों में मेहंदी रचाना शà¥à¤ माना जाता है। नई-नई डिज़ाइन जैसे –
अरेबिक मेहंदी
पारंपरिक à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ मेहंदी
फà¥à¤²à¤•ारी डिजाइन
मंडला आरà¥à¤Ÿ
🎉 शà¥à¤à¤•ामनाà¤à¤ और बधाई संदेश
“आपके दामà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¯ जीवन में सदैव पà¥à¤°à¥‡à¤® और सà¥à¤–-शांति बनी रहे। शà¥à¤ हरतालिका तीज।”
“à¤à¤—वान शिव-पारà¥à¤µà¤¤à¥€ का आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ आप पर बना रहे। हैपà¥à¤ªà¥€ हरतालिका तीज 2025।”
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